कितने दिन से दबी बात, आज होंटो पे बयां हूई है;
मेरी जाने तमन्ना मुझे तुमसे मोहब्बत हूई है:
मेरे प्यार को मत देना तुम दीवानगी का नाम;
क्योंकि ये लगता है, मुझे अब आखरी बार मोहब्बत हूई है:
तेरे दीदार मुझे चाँद की याद दिलाता है,
आज फिर चाँद देखने की हसरत हूई है;
मुझे अब आखरी बार मोहब्बत हूई है:
तेरे हाँ के इंतज़ार में सुबह से शाम हूई है;
मुझे न ना करना, मुझे अब आखरी बार मोहब्बत हूई है...
Friday, December 10, 2010
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